जाने मरने बाद आत्मा कितने दिन उसके घर में रहती है ?

दोस्तों जैसा कि आप जानते ही है कि गरुड पुराण में मनुष्य के जीवन से उसके मरने तक का पूरा विवरण सुनने को मिलता है. यदि आपने गरुण पुराण नही पढ़ा है और आपको इसके बारे में कोई जानकारी नही है तो आज हम आपको उस एक सच के बारे में बतायेंगे जिससे आप अनजान है.

अक्सर हमे लगता है कि मौत के तुरंत बाद आत्मा परलोक चली जाती है जबकि ऐसा कुछ नही होता है. मरने के कुछ दिन तक मृतक की आत्मा आपके आसपास रहती है. शायद आपको कई बार ये आभास भी हुआ होगा कि कोई है जो आपके साथ चल रहा है.

24 घंटे के लिए ले जाते है यमदूत आत्मा को साथ

जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो उसकी आत्मा को यमदूत केवल 24 घंटो के लिए ले जाते है और इस समय में आत्मा को उसके पुरे जीवन का लेखा जोखा दिखाया जाता है. इसके बाद आत्मा को उसी के घर में छोड़ दिया जाता है जहाँ उसने अपने शरीर का त्याग किया था.

फिर 13 दिन तक आत्मा अपने घर में ही रहती है. 13 दिन बात जाने के बाद एक बार फिर से आत्मा को यमलोक ले जाया जाता है.

जिस समय आदमी की मौत नजदीक होती है तो उसके सामने यमराज के 2 डरावने यमदूत आते है. जिनके बाल उपर की तरफ उठे हुए होते है और वे कोयले के समान खाले होते है. इनके नाख़ून भी बहुत बड़े और नुकीले होते है. उन्हें देखते ही व्यक्ति अपने स्थान पर ही मल – मूत्र कर देता है और अपने शरीर से हाय हाय का विलाप करते हुए अपने प्राण त्याग देता है.

इसके बाद उसके शरीर से अंगूठे के बराबर आत्मा निकलती है जिसे यमदूत पकड़ लेते है. आत्मा अपने घर की तरफ भागती है जबकि यमदूत उसे अपनी तरफ खींचते हुए ले जाते है .

नर्क में पाप की मिलती है सजा

पुरे रास्ते चलते हुए यमदूत आत्मा को डराते रहते है और नर्क में मिलने वाले दण्डो का बार बार वर्णन करते है. आत्मा को कई तरह की यातनाएं दी जाती है. आत्मा जोर जोर से रोने लगती है. रास्ते में उसे सांप बिच्छू काटते है और आत्मा अपने पापो को याद करते हुए रोते बिलखते यमदूतो के पीछे चल देती है.

भूखे प्यासी आत्मा को यमदूत गरम् कोढ़े मारते है. ऐसे में आत्मा को पीने के लिए पानी भी नही दिया जाता है और न वह किसी तरह का आराम कर सकती है. आत्मा जगह जगह गिरती है और बेहोश होकर फिर होश में आने पर चलने लगती है . इस तरह से आत्मा यमलोक पहुँचती है जहाँ उसे उसके पापो की सजा देकर फिर यमदूत के साथ पृथ्वी पर भेज दिया जाता है.

मोह से बंधी आत्मा अपने शरीर में प्रवेश करना चाहती है लेकिन उसे यमदूत रस्सी से बांधकर रखते है. आत्मा अपने परिवार -रिश्तेदारों को अपनी मौत का शोक मनाते देखती है. भूख प्यास से दुखी आत्मा जोर जोर से रोने लगती है. व्यकित की मृत्यु के बाद जितने भी दान किये जाते है उससे आत्मा को शांति नही मिलती है क्योंकि उसके पाप इन दान पुण्यो से  कहीं ज्यादा अधिक है.

इसलिए आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए पिण्डदान जरुर करवाना चाहिए. इससे ही आत्मा को कुछ खाने को मिल पाता है. जिन लोगो का पिंडदान नही किया जाता है वे प्रेत बनकर जंगलो में दुखी होकर भटकते रहते है. करोड़ो साल तक वह अपने पापो की सजा भोगता है उसे मनुष्य जीवन भी नहीं मिल पाता है.

7 दिन तक करना चाहिए पिंडदान

गरुड पुराण में बताया गया है कि बेटे को 7 दिन तक पिंडदान करना चाहिए. हर दिन पिंड 4 भागो में विवक्त होते है जिसमे से 2 भाग प्रेत के देह के पंचभूतो की पुष्टि के लिए होते है तीसरा भाग यमदूत को मिलता है और चौथा भाग से आत्मा को आहार प्राप्त होता है.

कहा जाता है कि मृत्यु के बाद शरीर के जल जाने पर पिंड के द्वारा उसे दोबारा एक हाथ लम्बा शरीर प्राप्त होता है जिसके द्वारा वह प्राणी यमलोक के रास्ते में अपने कर्म और पाप के फल को भोगता है. पहले दिन जप पिंड दिया जाता है उससे उसका शरीर बनता है दुसरे दिन की पिंड से जीवा गर्दन और तन व् तीसरे पिंड से हृदय बनता है और चौथे पिंड से पीछे का भाग.

पांचवे पिंड से नाभि. छठे और सातवे पिंड से कमर और गुप्तांग उत्पन्न होते है. आठवे से तांगे और नौवे से पैर उत्पन्न होते है. इस तरह से आत्मा का शरीर बनता है और वह भूख और प्यास से व्याकुल होती है. इसलिए 11 वे और 12 वे दिन वह भोजन करती है और फिर 13वे दिन बन्दर की तरह उसे बांधकर यमदूत लेकर यममार्ग पर चल देते है.

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